रँग रूड़ो, रँग सांतरो
रँग ही राचै रास
जिण रँग मै जीवन रच्यो
वो रँग रूड़ो खास।
मोहक रँग है प्रेम रो
मारु - मरवण साथ
प्रीत रँग मै रँग रिया
रख हाथां मै हाथ।
हाथा मै रख हाथ
गीत मिलण रा गावै
प्रीत मै रँग दे सायबा
यो रँग कदै ना जावै।
बादळ गरजै
बरखा बरसै
बीजळी ओला खावै
सेजा नार
पिया बिन तरसै
छैल भंवर कद आवै।
सावण मै
कोयल जद बोलै
मीठा गीत सुणावै
कोयल बोल
हिये में लागै
ओ रँगड़ो नहीं भावै
चावो रँग है
रणभूमि रो
जे कोई
रँग लगावै
प्रेम प्यार का
सगळा ही रँग
इण रँग मै
रँग ज्यावै।
केशरिया रँग
जो कोई रँग ले
शीश रक्त रो टीको
साँचो रँग
कोई रँगे शूरमा
बाकी सब रंग फीको
कवि महेंद्र सिंह कविया
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